गुरुवार, 13 जनवरी 2011

विश्व शांति हेतु सूरीनाम में सूर्य कुंभ का आयोजन



विश्व शांति हेतु सूरीनाम में सूर्य कुंभ का आयोजन


दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में 14 जनवरी से सूर्य कुंभ पर्व का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्घाटन वहां के राष्ट्रपति श्री देसी बोतरस करेंगे। देश की राजधानी पारामारीबो में सूरीनाम नदी के तट पर आयोजित होने वाले इस कुंभ मेले का समापन 18 फरवरी को होगा। देश के इतिहास में इस प्रकार के मेले का आयोजन पहली बार हो रहा है। इसको लेकर सूरीनाम के अलावा त्रिनिडाड, अमेरिका, नार्वे, फ्लोरिडा, नीदरलैंड; आदि देशों के हिंदुओं में काफी उत्साह है। इस पर्व में भारत और सूरीनाम सहित दुनिया के सैंकड़ो विद्वान हिस्सा लेंगे। इस संदर्भ में “विश्व हिंदू वॉयस” न्यूज वेब-पोर्टल से जुड़े पवन कुमार अरविंद ने नई दिल्ली से दूरभाष पर सूरीनाम में “सूर्य कुंभ पर्व आयोजन समिति” के अध्यक्ष श्री महेंद्र प्रसाद रूदी रामधनी से बातचीत की है। प्रस्तुत है अंश-

Que. कुम्भ पर्व के आयोजन की प्रेरणा आपको कहां से मिली?

Ans. इसकी प्रेरणा मुझे आचार्य शंकर से मिली। आचार्य जी सूरीनाम के कारीगांव के निवासी हैं। वह हालैंड व सूरीनाम में सनातन धर्मसभा के अध्यक्ष हैं। उन्होंने ही मुझे इस कार्य के लिए प्रेरित किया। समय-समय पर उनसे आवश्यक सुझाव भी मुझे मिलता रहता है।

Que. इसके आयोजन का स्वरूप क्या है?

Ans. इस आयोजन में सभी लोगों का हार्दिक स्वागत है। हमें उम्मीद है कि इसमें सूरीनाम के बाहर के लोग भी भारी संख्या में हिस्सा लेंगे। सूरीनाम व भारत के अलावा त्रिनिडाड, अमेरिका, नार्वे, गुयाना, फ्लोरिडा, नीदरलैंड समेत दुनिया के कई देशों के विद्वानों को भी आमंत्रित किया गया है, जो विश्व में सुख-शांति की स्थापना और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार सहित कई गंभीर विषयों पर चिंतन-मंथन करेंगे।

पर्व के दौरान सूरीनाम के सभी मंदिरों से कलश पूजन करके कुंभ परिसर में लाया जाएगा। कलश पूजन में हिस्सा लेने वाले लोग कुंभ के दौरान भजन-कीर्तन भी करेंगे, ऐसी योजना बनाई गई है। इस दौरान श्रद्धालु वैरागी अखाड़ा के भारतीय संत स्वामी ब्रह्मस्वरूपानंद जी महाराज के प्रवचन का आनंद भी उठा सकते हैं। वे पिछले कई वर्षों से विदेशों में रामकथा व भागवतकथा के माध्यम से भारतीय संस्कृति और सभ्यता के प्रचार-प्रसार के कार्य में सक्रिय हैं।

Que. कुंभ मेला भारत में लगता है, फिर सूरीनाम में आप क्यों आयोजित कर रहे हैं?

Ans. हम लोग भारतीय मूल के हैं। हमारे पूर्वज आज से करीब 170 वर्ष पूर्व गिरमिटिया मजदूर के रूप में सूरीनाम और त्रिनिडाड; आदि देशों में आए थे। भारतीय मूल का होने के कारण वहां की संस्कृति और सभ्यता से गहरा जुड़ाव है। सूरीनाम की जनसंख्या करीब पांच लाख है, जिसमें करीब 38 प्रतिशत हिंदू हैं। भारत में जो कुंभ लगता है उसका बहुत बड़ा महत्व है। उसके आयोजन का महात्म्य समुद्र मंथन से जुड़ा है। भारत में हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में हर बारहवें एवं छठवें वर्ष क्रमशः कुंभ व अर्द्धकुंभ मेले का आयोजन होता है। इन आयोजनों में विश्व भर के लाखों लोग हिस्सा लेते हैं। इसके अलावा ऐसे भी लोग हैं जिनको आर्थिक कारणों से भारत पंहुचना संभव नहीं हो पाता। उनके लिए इसके विकल्प के तौर पर सूरीनाम में कुम्भ मेले का आयोजन किया जा रहा है। मुझे विश्वास है कि यह आयोजन उन सभी प्रवासी भारतीयों के लिए एक वरदान साबित होगा, जो भारत पंहुच कर माघ स्नान का पुण्य नहीं प्राप्त कर सकते।



Que. इसके आयोजन का क्या उद्देश्य है?

Ans. सूरीनाम में सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार ही इस आयोजन का उद्देश्य है। इसके अलावा सनातन धर्म को मानने वाले दुनिया के सभी साधु-संत और विद्वान एक जगह एकत्रित होकर विश्व के लिए सुख शांति का मार्ग खोज सकें, भी उद्देश्य है। इसके आयोजन के लिए ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती समेत कई संतों ने शुभकामनाएं दी हैं।

Que. विश्व शांति में भारतीय संस्कृति और सभ्यता का क्या योगदान है?

Ans. मेरे विचार से भारतीय संस्कृति और सभ्यता को ही सनातन धर्म कहा जाता है। दुनिया में इसके प्रचार का उद्देश्य सभी मत, पंथ और सम्प्रदाय के लोगों में एकता स्थापित करना है। मुझे यह विश्वास है कि सनातन धर्म सत्य पर आधारित है और सत्य की स्थापना से ही विश्व में शांति की स्थापना हो सकेगी।

Que. अपने बारे में कुछ बताइए?

Ans. मेरी पैदाइश और शिक्षा-दीक्षा सूरीनाम में हुई। शिक्षा के बाद मैंने व्यापार शुरू किया। ईश्वर की कृपा से मेरा व्यवसाय ठीक चल रहा है। समाजिक कार्यों को करने से मानसिक शांति की अनुभूति होती है। इसलिए जब तक शरीर में सांस है, करते रहने का प्रयास करता रहूंगा।

शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

क्या बाबर मुस्लिम था ?


भारतीय राजनीती में बाबर तथा बाबरी मस्जिद का नाम लाखो बार सुनते सुनते आजिज हो गया था , मन में ये विचार बाबर उठता था की आखिर बाबर कौन था? प्राथमिक विद्द्याल्या में थोरा पढ़ा भी था लेकिन जानकारी पूरी नही थी ,हमारा यह पूरा विश्वास था कि बाबर एक पक्का मुसलमान था,मुसलमान होने के नाते वो ५ वक्ता की नमाज जरुर करता रह होगा शराब को हाथ भी नहीं लगता होगा , पर अचानक हमने कुछ ऐसा पढ़ा कि जिससे इस बाबर के चरित्र के कुछ और रंग सामने आये! और तब हमें लगा कि बाबर को मुसलमान कहना भी इस्लाम का अपमान है . तथा कथित वामपथी कलम जेहादी जिसको मुसलमान कहते नहीं थकते वो खुद आने को किस तरह से पेशा करता है जरा इनोसोचन चाहिए , तथ जोलोग येभी नहीं कटे थकते की बाबर ने मस्जिद बनायीं थी मंदिर नहीं तोरा था उन लोगो को एक बार बाबर नामा पढ़ना चाहिए , खुद बाबर के लिखे बाबरनामा से यह पता चलता है कि राम मंदिर तोड़कर उसके नाम पर बनाया गया ढांचा असल में मस्जिद ही नहीं था! ऐसा इसलिए क्योंकि बाबर खुद मुसलमान ही नहीं था! क्योंकि-
बाबर एक homo , नशेड़ी, शराबी था
बाबरनामा के विभिन्न पृष्ठों से लिए गए निम्नलिखित अंश पढ़िए
१. पृष्ठ १२०-१२१ पर बाबर लिखता है कि वह अपनी पत्नी में अधिक रूचि नहीं लेता था बल्कि वह तो बाबरी नाम के एक लड़के का दीवाना था. वह लिखता है कि उसने कभी किसी को इतना प्यार नहीं किया कि जितना दीवानापन उसे उस लड़के के लिए था. यहाँ तक कि वह उस लड़के पर शायरी भी करता था. उदाहरण के लिए- “मुझ सा दर्दीला, जुनूनी और बेइज्जत आशिक और कोई नहीं है. और मेरे आशिक जैसा बेदर्द और तड़पाने वाला भी कोई और नहीं है.”

२. बाबर लिखता है कि जब बाबरी उसके ‘करीब’ आता था तो बाबर इतना रोमांचित हो जाता था कि उसके मुंह से शब्द भी नहीं निकलते थे. इश्क के नशे और उत्तेजना में वह बाबरी को उसके प्यार के लिए धन्यवाद देने को भी मुंह नहीं खोल पता था.
३. एक बार बाबर अपने दोस्तों के साथ एक गली से गुजर रहा था तो अचानक उसका सामना बाबरी से हो गया! बाबर इससे इतना उत्तेजित हो गया कि बोलना बंद हो गया, यहाँ तक कि बाबरी के चेहरे पर नजर डालना भी नामुमकिन हो गया. वह लिखता है- “मैं अपने आशिक को देखकर शर्म से डूब जाता हूँ. मेरे दोस्तों की नजर मुझ पर टिकी होती है और मेरी किसी और पर.” स्पष्ट है की ये सब साथी मिलकर क्या गुल खिलाते थे!

४. बाबर लिखता है कि बाबरी के जूनून और चाह में वह बिना कुछ देखे पागलों की तरह नंगे सिर और नागे पाँव इधर उधर घूमता रहता था.
५. वह लिखता है- “मैं उत्तेजना और रोमांच से पागल हो जाता था. मुझे नहीं पता था कि आशिकों को यह सब सहना होता है. ना मैं तुमसे दूर जा सकता हूँ और न उत्तेजना की वजह से तुम्हारे पास ठहर सकता हूँ. ओ मेरे आशिक (पुरुष)! तुमने मुझे बिलकुल पागल बना दिया है”.
इन तथ्यों से पता चलता है कि बाबर समलैंगिक था . अब यदि इस्लामी शरियत की बात करें तो समलैंगिकों के लिए मौत की सजा ही मुक़र्रर की जाती है. बहुत से इस्लामी देशों में यह सजा आज भी दी जाती है. बाबर को भी यही सजा मिलनी चाहिए थी. दूसरी बात यह है कि उसके नाम पर बनाए ढाँचे का नाम “बाबरी मस्जिद” था जो कि उसके पुरुष आशिक “बाबरी” के नाम पर था! हम पूछते हैं कि क्या अल्लाह के इबादत के लिए कोई ऐसी जगह क़ुबूल की जा सकती है कि जिसका नाम ही समलैंगिकता के प्रतीक बाबर के पुरुष आशिक “बाबरी” के नाम पर रखा गया हो? इससे भी बढ़कर एक आदमी द्वारा जो कि मुसलमान ही नहीं हो, समलैंगिक और बच्चों से कुकर्म करने वाला हो, उसके नाम पर मस्जिद किसी भी मुसलमान को कैसे क़ुबूल हो सकती है?
यह सिद्ध हो गया है कि बाबरी मस्जिद कोई मस्जिद नहीं थी जहा खुदा के लिए नमाज होती वहा तो गे लोगो का अड्डा बनता लेकिन बहादुर हिंदुवो ने गे अड्डा बनाने से रोक कर समजा का भला किया तथा एक काफ़िर के सपनो को चूर करदिया . बाबरी नाम से जो कुछ भी बनेगा चाहे मस्जिद ही हो . समलैंगिकता और बाल उत्पीडन का प्रतीक होगी इस लिए भारत में जा दुनिया में बाबरी नाम से जो भी बनेगा मानवता के खिलाफ होगा . और अल्लाह, मुहम्मद, इस्लाम आदि के नाम पर कलंक होगा . मुसलमानों द्वारा ही एसी ईमारत को नेस्तोनाबूत कर दिया जाना चाहिए .
बाबर मानव हत्यारा , लुटेरा, बलात्कारी, शराबी
यहाँ पर इस विषय में कुछ ही प्रमाण
मानव हत्यारा बाबर
पृष्ठ २३२- वह लिखता है कि उसकी सेना ने निरपराध अफगानों के सिर काट लिए जो उसके साथ शान्ति की बात करने आ रहे थे. इन कटे हुए सिरों से इसने मीनार बनवाई. ऐसा ही कुछ इसने हंगू में किया जहाँ २०० अफगानियों के सिर काट कर खम्बे बनाए गए.
पृष्ठ ३७०- क्योंकि बाजौड़ में रहने वाले लोग दीन (इस्लाम) को नहीं मानते थे इसलिए वहां ३००० लोगों का क़त्ल कर दिया गया और उनके बीवी बच्चों को गुलाम बना लिया गया.
पृष्ठ ३७१- गुलामों में से कुछों के सिर काटकर काबुल और बल्ख भेजे गए ताकि फतह की सूचना दी जा सके.
पृष्ठ ३७१- कटे हुए सिरों के खम्बे बनाए गए ताकि जीत का जश्न मनाया जा सके.
शराबी बाबर
पृष्ठ ३७१- मुहर्रम की एक रात को जश्न मनाने के लिए शराब की एक महफ़िल जमाई गयी जिसमें हमने पूरी रात पी. (पूरे बाबरनामा में जगह जगह ऐसी शराब की महफ़िलों का वर्णन है. ध्यान रहे कि शराब इस्लाम में हराम है.)
नशेडी बाबर
पृष्ठ ३७३- बाबर ने एक बार ऐसा नशा किया कि नमाज पढने भी न जा सका. आगे लिखता है कि यदि ऐसा नशा वह आज करता तो उसे पहले से आधा नशा भी नहीं होता.
पृष्ठ ३७४- बाबर ने अपने हरम की बहुत सी महिलाओं से बहुत से बच्चे उत्पन्न किये. उसकी पहली बेगम ने उससे वादा किया कि वह उसके हर बच्चे को अपनाएगी चाहे वे किसी भी बेगम से हुए हों, ऐसा इसलिए क्योंकि उसके पैदा किये कुछ बच्चे चल बसे थे. यह तो जाहिर ही है कि इसके हरम बनाम मुर्गीखाने में इसकी हवस मिटाने के लिए कुछ हजार औरतें तो होंगी ही जैसे कि इसके पोते स्वनामधन्य अकबर के हरम में पांच हजार औरतें थीं जो इसकी ३६ (छत्तीस) पत्नियों से अलग थीं. यह बात अलग है कि इसका हरम अधिकतर समय सूना ही रहता होगा क्योंकि इसको स्त्रियों से अधिक पुरुष और बच्चे पसंद थे! और बाबरी नाम के बच्चे में तो इसके प्राण ही बसे थे.
पृष्ठ ३८५-३८८- अपने बेटे हुमायूं के पैदा होने पर बाबर बहुत खुश हुआ था, इतना कि इसका जश्न मनाने के लिए अपने दोस्तों के साथ नाव में गया जहां पूरी रात इसने शराब पी और नशीली चीजें खाकर अलग से नशा किया. फिर जब नशा इनके सिरों में चढ़ गया तो आपस में लड़ाई हुई और महफ़िल बिखर गयी. इसी तरह एक और शराब की महफ़िल में इसने बहुत उल्टी की और सुबह तक सब कुछ भूल गया.
पृष्ठ ५२७- एक और महफ़िल एक मीनारों और गुम्बद वाली इमारत में हुई थी जो आगरा में है. (ध्यान रहे यह इमारत ताजमहल ही है जिसे अधिकाँश सेकुलर इतिहासकार शाहजहाँ की बनायी बताते हैं, क्योंकि आगरा में इस प्रकार की कोई और इमारत न पहले थी और न आज है! शाहजहाँ से चार पीढी पहले जिस महल में उसके दादा ने गुलछर्रे उड़ाए थे उसे वह खुद कैसे बनवा सकता है?)
बाबरनामा का लगभग हर एक पन्ना इस दरिन्दे के कातिल होने, लुटेरा होने, और दुराचारी होने का सबूत है. यहाँ यह याद रखना चाहिए कि जिस तरह बाबर यह सब लिखता है, उससे यह पता चलता है कि उसे इन सब बातों का गर्व है, इस बात का पता उन्हें चल जाएगा जो इसके बाबरनामा को पढेंगे. आश्चर्य इस बात का है कि जिन बातों पर इसे गर्व था यदि वे ही इतनी भयानक हैं तो जो आदतें इसकी कमजोरी रही होंगी, जिन्हें इसने लिखा ही नहीं, वे कैसी क़यामत ढहाने वाली होंगी?
प्रश्न ये है
१. क्या एक आदमी homo होकर भी मुसलमान हो सकता है?
२ बच्चों के साथ बलात्कार करके भी मुसलमान हो सकता है?
३ शराब पीकर नमाज न पढ़कर भी, चरस, गांजा, अफीम खाकर भी मुसलमान हो सकता है ?
४ हजारों लोगों के सिर काटकर उनसे मीनार बनाकर भी मुसलमान हो सकता है?
५ लड्को से बलात्कार करके भी मुसलमान हो सकता है?
६ अगर हो सकता है तो फिर वह कौन है जो मुसलमान नहीं हो सकता?
७ क्या कोई मुल्ला बाबर को मुसलामन कह सता है ?
८ .क्या तथा कथित बाबरी मस्जिद को मस्जिद कहना उचित है?
९ अपने पुरुष आशिक के नाम पर बने ढाचे को मस्जिद कहना हराम नहीं है?
१० क्या किसी बलात्कारी homo शराबी व्यभिचारी के पुरुष आशिक के नाम की मस्जिद में अता की गयी नमाज अल्लाह को क़ुबूल होगी?
११ जब वो जगह मस्जिद ही नहीं तब मुल्ला लोग इतना हो हल्ला दंगा फसाद क्यों कर रहे हैं? १२ क्या इसका टूटना इस्लाम पर लगे कलंक को मिटाने जैसा नहीं था?
१३ क्या यह काम बहुत पहले ही खुद मुसलमानों को नहीं करना चाहिए था?

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

Pakistan Sadhu (heilige man) ontvoerd


Pakistan Sadhu (heilige man) ontvoerd
Op 2 december 2010 is in Pakistan een Sadhu (heilige man) ontvoerd en er wordt losgeld voor hem gevraagd. Deze Sadhu is het hoofd van de Kali Mata Mandir in Baluchistan en hij is 82 jaar oud. De regering heeft nog niets gedaan om hem op te sporen. Zoals altijd lopen religieuze minderheidsgroepen gevaar in Pakistan. Stichting Sanatan Dharma Nederland vraagt de regering van Pakistan om deze man op te sporen en mensen uit minderheidsgroeperingen te beschermen.
http://khabar.ibnlive.in.com/news/45731/2

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

हिंदू लड़के से प्रेम के कारण अभिनेत्री को धमकी




लंदन। हॉलीवुड फिल्म 'हैरी पॉटर' की अभिनेत्री अफशान आजाद को एक हिंदू युवक के साथ प्रेम करने पर उनके परिवार वालों ने उनकी पिटाई की है और उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

फिल्म में पद्मा पाटिल का किरदार अदा करने वाली 22 वर्षीय अफशान आजाद ने परिवार पर आरोप लगाया है कि उनके पिता अब्दुल आजाद और भाई अशरफ आजाद उन्हें सिर्फ इसलिए जान से मारना चाहते हैं क्योंकि वह एक हिन्दू से प्यार करती है। अभिनेत्री ने बताया कि हिंदू लड़के से मिलने पर परिवार वालों ने उन्हें वेश्या तक कहा।

अभिनेत्री के आरोप के बाद पुलिस ने उनके पिता और भाई को हिरासत में लेकर मैनचेस्टर क्राउन की अदालत में पेश किया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

कश्मीरी लोगो की भी सुनिए

कश्मीरी पंडितों की पीड़ा है कि अलगाववादियों और अरुंधती राय को सुनने के लिए तो सब तैयार रहते हैं, पर उनके दर्द को दबा दिया जाता है। इसी मुद्दे पर पनुन कश्मीर के संयोजक डॉ अग्निशेखर से वेद विलास उनियाल ने बात की :

-कश्मीरी पंडित क्या चाहते हैं?
आप देखेंगे कि कश्मीर के संदर्भ में इस समय चार विचारधाराएं हैं। एक वे लोग हैं, जो कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं। दूसरे वे हैं, जो इसे स्वतंत्र इसलामी राज्य (निजाम-ए-मुस्तफा) बनाना चाहते हैं। तीसरी धारणा यह है कि कश्मीर में अलग तरह की स्वायत्तता हो, संयुक्त प्रशासन हो, लो-मिलिटरी कंट्रोल हो। हम कश्मीरी घाटी के अंदर भारतीयों की तरह जीना-बसना चाहते हैं।

- लेकिन अरुंधती राय तो कश्मीर की दूसरी व्याख्या करती हैं?
कश्मीर अरुंधती के कहने से नहीं चलेगा। उन्हें इतिहास की जानकारी नहीं है। जानना हो, तो यह जानिए कि वह किन शातिर हाथों में खेल रही हैं।

- हाल में कश्मीर में जो स्थिति बिगड़ी, उसके जिम्मेदार कौन हैं?
जब भी स्थिति बिगड़ती है, उसके पीछे नकारा किस्म की राजनीति ही जिम्मेदार होती है। केंद्र आगे बढ़कर कोई ऐक्शन नहीं लेता। मीरवाइज और गिलानी जैसे लोग राष्ट्रद्रोह की बात करते हैं, सरकार खामोश रहती है। स्थिति मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नियंत्रण में नहीं है। तय मानिए कि जिस तरह की स्थिति कश्मीर में हुई, कोई दूसरा राज्य होता, तो मुख्यमंत्री बदल जाता।

- भाजपा के साथ समान उद्देश्य के लिए साझा संघर्ष में क्या दिक्कतें हैं?
भाजपा बेशक अनुच्छेद 370 को खत्म करने की बात करती हो, लेकिन वह भी कई मामलों में दूसरे दलों से अलग नहीं है।

- ऐसा लगता है कि कश्मीरी पंडितोंकी घाटी में लौटने की लालसा खत्म हो गई?
यहूदियों ने इस्राइल को पाने के लिए 1,800 वर्षों तक संघर्ष किया। तिब्बत के लोग पिछले चालीस साल से यहां रहकर चीन से अपने हकों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। क्या इस दौरान उन्होंने अपने दूसरे कामकाज, सामाजिक जीवन रोक दिया? आप कश्मीरी पंडितों के साथ केवल बीस साल में उदासीनता की बात करते हैं। कश्मीरी लोग पढ़े-लिखे, बौद्धिक हैं। हर पनुन कश्मीरी अपनी माटी से जुड़ने की लालसा लिए हुए है।

- मीरवाइज उमर फारूक के साथ चंडीगढ़ में हुए विरोध प्रदर्शन को देखते हुए क्या यह माना जाए कि कश्मीरी पंडित भी अब अपनी मांगों को लेकर उग्र हो रहे हैं? या यह हताशा का परिणाम है?
कश्मीरी पंडित लंबे समय तक शांत होकर अपने हकों के लिए लड़ते रहे हैं। लेकिन अब हम महसूस करते हैं कि देश के खिलाफ बोलने वालों का, जहां जिस तरह की स्थिति होगी, उसी शैली में विरोध किया जाएगा। जिन लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा बनना चाहिए उन्हें नेता, समाजसेवी, विचारक कहा जा रहा है।

- ऐसे में समाधान की कोई राह नजर नहीं आती?
जी नहीं, पहले भी कह चुका हूं कि समाधान है। पर उसके लिए आप अपनी दृष्टि को व्यापक कीजिए। देश को तोड़ने और लोगों को गुमराह करनेवालों को तरजीह क्यों देनी चाहिए? इस पर नजरिया साफ होना चाहिए कि क्या देश के खिलाफ बोलने वालों को खुला घूमने दिया जाए। फिर आपको हमारे संघर्ष में सचाई दिखेगी।

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

फारूख को राष्ट्रवाद का मुक्का


चंडीगढ़। चंडीगढ़ में एक सेमिनार में भाग लेने आए हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई की गई। जब उमर फारूक ने सेमिनार में बोलना शुरू ही किया था तो एक शख्स ने अचानक से उनपर हमला कर दिया। इसके बाद माहौल अस्त-व्यस्त हो गया।


इस दौरान कई लोग चोटिल हो गए। सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने उमर को सुरक्षा घेरे में ले लिया। मालूम हो कि कश्मीर मसले और भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत के मसले पर ये सेमिनार रखा गया। इस दौरान लोगों ने उमर के साथ हाथापाई शुरू कर दी।
वहीं जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने इस मसले पर कहा कि हुर्रियत के लोग जिस तरह की राजनीति करते हैं उससे ऐसा होना स्वाभिक है। मैं किसी भी स्तर पर इसकी निंदा नहीं करूंगा।
पुरे कश्मीर की जनता इसका स्वागत करती है .इन तथा कथित तोहफा वादी नेतावो को जनता का जबाब इसी तरह से मिलाना चाहिए (तोहफा वादी इसलिए की ये सभी गिलानी भी पाकिस्तान से तोहफा या घूस कहिये खाते है कश्मीरी जनता को भरका कर उनकी जान लेते है )

रविवार, 21 नवंबर 2010

कांग्रेस एक आंतकवादी पार्टी

कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पिछले दिनों से भगवा आतंकवाद पर अनर्गल दुष्प्रचार करना शुरू किया हुआ था परन्तु जब यह उल्टा पडने लगा तो अब ये सोनिया जी की रहनुमाई में हिंदू संगठनों का सीधे नाम लेकर अपने अधूरे रह गये एजेंडे को पूरा करने का षडयन्त्र कर रहे हैं। मालेगांव मामले में कुछ हिन्दू सन्तों और अन्यों को पकड कर इनको अपनी कहानी की पटकथा को पूरा करने मौका मिल गया और ऐसी सब घटनाओं, जिसमें एक भी मुसलमान मरा था , के तार अब वे इनके साथ जोडने के प्रयास कर रहे हैं। इस षडयन्त्र में वे सी०बी० आई० से लेकर प्रांतीय सुरक्षा बलों का खुल कर दुरुपयोग कर रहे हैं और सैक्युलर मीडिया इनका खुल कर साथ दे रहा है। मालेगांव से शुरु करके हैदराबाद,समझौता ऐक्स० और अब अजमेर विस्फोट तक इन सब घटनाओं में हिंदू संगठनों का नाम घसीटा जा रहा है। अधिकांश घटनाओं के अपराधी पकडे जा चुके थे। उनके संबंध हूजी या लश्कर के साथ थे। अब वे हिंदू नेताओं के नाम ले रहे हैं। इस कोशिश में ये न केवल पूरी दूनिया में अपने देश को बदनाम कर रहे हैं अपितु आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लडाई को कमजोर करने का महापाप कर रहे हैं। यह आश्चर्य है कि इन्होने कश्मीर में आये भूकम्प, जिसमें कई मुसलमान मरे थे, में अभी तक संघ का नाम क्यों नहीं लिया। पहले ऐसे हिंदु संगठनों का नाम लिया गया जिनको कोइ नहीं जानता था। जब इनके घटिया इरादे पूरे होते नहीं दिखे तो अब ये सीधे-सीधे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम लेने का दुःसाहस करने लगे हैं। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी से शुरू किया गया यह हमला अब उनकी माताश्री ने आगे बढा दिया और उनके चरणचुम्बन करने वाले नेताओं ने इस पर मर्यादाहीन बयानबाजी शुरू कर दी। ऐसे कारनामे ये पहले भी कर चुके हैं। जवाहर लाल नेहरु से लेकर इन्दिरा गांधी तक इस आग में ये अपने हाथ जला चुके हैं। परंतु हर बार इनको शर्मिंदगी झेलनी पडी है। इनको इतिहास से सबक लेना चाहिये था। परंतु ऐसा लगता है कि इस बार भी ये मूंह की खाकर ही मानेंगे ।

बिहार के चुनाव चल रहे हैं और उत्तरप्रदेश के चुनाव नजदीक हैं। इन दोनों जगह मुस्लिम वोटों का महत्व सबको समझ में आता है। हिंदू संगठनों का नाम बदनाम कर मुस्लिम वोटों को रिझाया जा सकता है, यह कांग्रेस की हमेशा से चाल रही है। इस समय भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी कांग्रेस को कामनवैल्थ और आदर्श सोसाइटी के घोटालों से अपना दामन छुडाना मुश्किल दिखाइ दे रहा हैं । देश की जनता का ध्यान इस ओर से हटाने के लिये ये लोग हिंदु आतंकवाद का हौव्वा खडा करने का षडयन्त्र कर रहे हैं। परन्तु वे इस षडयन्त्र में सफल नहीं हो पायेंगे। अभी तक किसी व्यक्ति या संगठन के विरूद्ध कोइ सबूत नहीं है। कई साल पुराने मामलों में भी चार्जशीट तक नहीं पेश कर सके हैं। एक-दो व्यक्तियों को पकडने से पूरे संगठन को कैसे बदनाम कर सकते हैं? इस आधार पर यदि विचार करेंगे तो कांग्रेस पार्टी सबसे बडी आतंकी और भ्रष्ट पार्टी है जिसमें ये सब काम कांग्रेस अध्यक्ष के इशारे पर किये जाते हैं। यदि इन सब अपराधों की सूची बनायी गयी तो समस्त कांग्रेस अध्यक्ष विश्व के सबसे बडे अपराधी और आतंकवादी सिद्ध हो जायेंगे। ऐसे अपराधों की सूची बहुत बडी है। कई अपराध तो बडे नेताओं ने ही किये हैं। इनमे से कई सिद्ध भी हो चुके हैं। इन सबके नाम एक ब्लाग में लिखना असंभव है। फिर भी कुछ घटनाओं के वर्णन से ही स्पष्ट हो जायेगा कि कांग्रेस ही देश की सबसे बडी आतंकवादी पार्टी है और आतंकवाद को यदि मिटाना है तो सबसे पहले इसकी जननी कांग्रेस पर प्रतिबंध लगाना पडेगा।

कोयम्बतूर विस्फोट के प्रमुख अपराधी मदनी के साथ इनके संबंध बहुत पुराने हैं। इन्होंने कम्युनिष्ट पार्टी के साथ मिलकर न केवल जेल से छुडाया था अपितु जब कर्नाटक की पुलिस एक अन्य मामले में पकड्ने गई तो उनके काम में रोडे अटकाये थे। इशरत के मामले में इन्होनें उसको निरपराध सिद्ध करने के भरसक प्रयास किये जबकि लश्कर की वैबसाईट पर उसको लश्कर का आतंकी लिखा गया है जिसको नरेन्द्र मोदी को मारने का काम दिया गया था। बटला हाउस मुठ्भेड के बाद बटला हाउस तो मानो कांग्रेसियों के लिये काबा बन गया था जहां कई नेता सजदा करने जाते रहते थे। इन आतंकियों के प्रणेता आजमगढ में रहते थे। उनको बचाने की कोशिश में दिग्विजय् सिंह से लेकर छोटे बडे सभी नेता लगे लगे रहते थे। सिंमी जैसे दुर्दांत आतंकी संगठन के बचाव के लिये कांग्रेसियों ने जो कारनामे किये हैं, वे केवल उनके साथी ही कर सकते हैं। प्रतिबंध के खिलाफ उनकी लडाई लडने में इनका योगदान इनके संबंधों को बताने के लिये पर्याप्त है। उनके वकील के रूप प्रसिद्ध कांग्रसी नेता सलमान खुर्शीद ने दिन रात एक कर दिये थे। संसद में सोनिया जी ने सिंमी के पक्ष में लडाई की अगुवाइ की तो संसद के बाहर कांग्रेसियों ने धरने -प्रदर्शन कर उनके साथ अपनी निष्ठा को प्रदर्शित किया।मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह की छत्र छाया में सिमी का किस प्रकार विस्तार हुआ यह इनके संबंधों की गहराई को बताने के लिये काफी है। २००१ में उल्फा के साथ इन्होंने इनके साथ गठबंधन किया था और २००४ में नक्सलवादियों का सहयोग लेकर सरकार बनाने में इन्होंने कोइ संकोच नहीं किया था। आतंकी संगठनों के साथ इनके संबंधों और सहयोग की सूची बहुत बडी है परन्तु ये उदाहरण कांग्रेस का चरित्र बताने के लिये पर्याप्त हैं।

संबंध और सहयोग ही नहीं, इनकी आतंकी घटनाओं में प्रत्यक्ष सहभागिता के भी हजारों उदाहरण स्वतंत्र भारत के इतिहास में बिखरे पडे हैं। १९९३ में सूरत बम्ब विस्फोट भारत के लोग भूल नहीं सकते। इस घटना के प्रमुख अपराधी मौहम्मद सूरती को २० साल की सजा २००८ में सुनाई गई । सूरती साहब कांग्रेस सरकार मॅं मन्त्री रह चुके हैं। इनके साथ जिन अन्य १५ अपराधियों को सजा सुनाइ गई है वे भी कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे हैं। गोधरा में मासूम हिंदुओं को जलाने मॅ जिन अपराधियों के नाम प्रमुखता से लिये गये उनके नाम ५ मार्च के इंडियन एक्स० में छपे हैं। महमूद हूसैन कलोटा गोधरा कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ट के अध्यक्ष रहे हैं। सलीम अब्दुल गफ्फार शेख पंचमहल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। अब्दुल रहमान, फार्रुख माना, हाजी बिल्लाल आदि सब प्रमुख कांग्रेसी नेता रहे हैं। केवल यही नहीं , अगर गोधरा के बाद की प्रतिक्रिया को आतंकी घटना माना जाये तो इसमें भी कम से कम २५ कांग्रेसी नेताओं के नाम लिये जा रहे हैं।

३००० सिक्खों के कत्ले आम को कभी नहीं भुलाया जा सकता। इस नरसंहार के लिये केवल कांग्रेसी नेता ही कसूरवार हैं। मुसोलिनी की फासिस्ट परम्परा में पली सोनिया जी को देश की जनता का शुक्रगुजार होना चाहिये कि उन्होंने इस घटना में राजीव जी भूमिका की जांच के लिये नहीं कहा क्योंकि भारत में दिवंगत व्यक्ति को माफ कर दिया जाता है। गांधी जी की दुर्भाग्यजनक हत्या के बाद संघ के कार्यकर्ताओं और संघ कार्यालयों पर जिस प्रकार से कांग्रेसियों ने हमले किये थे, वे किसी भी तरह से सिक्खों पर हमले से कम नहीं थे । बाद में नेहरू जी द्वारा स्थापित कमीशन ने यह सिद्ध कर दिया था कि गांधी हत्याकांड में संघ का कोइ हाथ नहीं था। यह बात अलग है कि नेहरू जी ने अपनी गलती का परिमार्जन संघ को १९६३ की गणतंत्र दिवस की परेड में निमंत्रित करके किया था। 1977 में आपात काल की अपराधी इन्दिरा जी की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेसियों ने संपूर्ण देश में हिंसा का जो तांडव किया था वह उनके आतंकी चरित्र को ही उजागर करता है। दो कांग्रेसी नेताओं,देवेन्द्र पांडे और भोला पांडे ने लखनऊ से हवाई जहाज का अपहरण किया था। इनमें से एक को बाद में कांग्रेस ने विधायक बनाकर पुरस्कार दिया था। उस समय देश भर में हिंसक प्रदर्शन किये गये व सरकारी सम्पत्ती को नुकसान पहुंचाया गया। उडीसा में स्वामी लक्षमणानंद जी की हत्या का मुख्य आरोपी राधाकांत नायक कांग्रेस का ही सांसद है। इस जघंय हत्याकांड मॅं और भी कई कान्ग्रेसियों के नाम लिये जा रहे हैं। क्या ये घटनाएं कांग्रेस के आतंकी चरित्र को बताने के लिये पर्याप्त नहीं हैं? यदि सोनिया जी के तर्क को स्वीकार किया जाये तो शायद इनका कोई भी अध्यक्ष और प्रधान मंत्री जीवन भर जेल से बाहर नहीं आ सकता था।

कुछ और भी उदाहरण देश के लोगों की आंखें खोलने में सहायता करेंगे। पंजाब की अंदरूनी राजनीति मॅ विरोधियों को परास्त करने के लिये भिंडरवाले को सहायता कर किसने पंजाब को आतंक वाद की आग में झोंका था? भारत में लिट्टे के प्रशिक्षण की व्यवस्था किस नेता ने कराई थी? शेख अब्दुल्ला का साथ देकर किस नेता ने काश्मीर को आतंकियों के हवाले किया था जिसका दुष्परिणाम देश आज भी भुगत रहा है? अपनी पत्नी के टुकडे करके तंदुर में जलाने वाला नेता किस पार्टी का था?

यदि उपरोक्त घटनाओं का ही विचार किया जाये तो यह सहज ही सिद्ध होता है कि कांग्रेस ही इस देश की सबसे बडी आतंकवादी पार्टी है और आज देश आतंकवाद की आग में कांग्रेस के कारण ही जल रहा है। सोनिया जी, अब भी जाग जाओ। अपनी गिरेबान में झांको। यदि आप देश को प्यार करने लगी हैं तो चंद वोटों की खातिर देशभक्त संगठनों पर कीचड ऊछालना बंद कर दो। उनको बदनाम करने की जगह ,उनका सहयोग लो और आतंकवाद से देश को मुक्ति दिलाओ।